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वेब एनसीआरआई
युवा संवेदीकरण कार्यक्रम

वाइएसपी द्वारा युवा छात्रों की ग्रामीण भारत के बारे में समझ बनाना
भारतीय युवा सबसे अधिक संभावना वाला विश्व का सबसे बड़ा जनांकिकीय संवर्ग है। एनसीआरआइ का इरादा युवाओं को एक संसाधन के रूप में और गांधीवादी स्व-निर्भरता के विचारों के बीच में एक सेतु उपलब्ध करवाना है। इस उद्‌देश्य की प्राप्ति के लिए एनसीआरआइ ने 7 से 10 सितम्बर 2009 के मध्य एक युवा संवेदनशील कार्यक्रम आयोजित किया। वाईएसपी जो कि युवाओं को ग्रामीण भारत के मुद्‌दों और समस्याओं के बारे में समझ विकसित करती है ने ग्राफिक इरा यूनिवर्सिटी देहरादून के छात्रों के लिए हिमालय समेकित विकास समाज उत्तराखण्ड, बद्‌दी सोलन जिला हिमाचल प्रदेश के इंस्टीट्‌यूट ऑफ इंजीनियरिंग और इमर्जिंग टेक्नोलॉजी, ग्रामीण क्रियाओं से सामाजिक अपलिफ्ट समाज सूत्र जगजीत नगर सोलन जिला हिमाचल प्रदेश के सहयोग से किया गया। एनसीआरआइ के डॉ श्रीनिवासलु के साथ पूरी टीम थी। इस कार्यक्रम से छात्रों को ग्रामीण परिदृश्य को बहुत नजदीक से जानने की दृष्टि मिली। बातचीत और परिचर्चाओं के दौरान छात्रों के अनुभवों से लगा अपना कैरियर बनाने के लिए और सही मायनों में देश की सेवा करने के लिए लंबा रास्ता जाना होगा।

प्रकृति से सीख 
इस दो दिन के आयोजन का उद्‌देश्य (राष्ट्रीय ग्रामीण संस्थान हैदराबाद द्वारा) शहरी युवाओं को युवा संवेदना कार्यक्रम के तहत प्रत्यक्ष तौर पर ग्रामीण ज़िदगी के बारे में जागरूकता लाने की अवसर उपलब्ध कराना था। अधिक से अधिक तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर रहे 13 छात्रों ने पूरे दो दिन प्रकृति के साथ देशभर में जारी संस्थानीकृत क्रियाओं के माध्यम से व्यतीत किये। वे छात्र गांव क्यों गए? उन्हें गरीबी निवारक योजनाओं और स्वास्थ्य देखभाल साक्षरता कला को प्रोत्साहित करने, सूक्ष्म योजनाएं और स्वयं सहायता परियोजनाओं से सीधे सीखने के अवसर उपलब्ध करवाए गए थे। इन गतिविधियों से युवाओं को ग्रामीण जीवनशैली को वास्तविक तौर पर जानने का अवसर मिला। इस कार्यक्रम का आयोजन विभिन्न प्रमुख नामों जैसे इन्फोसिस नेतृत्व संस्था के सहयोग से किया गया। पद्मश्री डॉ बी वी राजू इंस्टीट्‌यूट ऑफ इंजीनियरिंग और नरसापुर जिला मेडक स्थित आदि संस्थानों ने इस पायलट परियोजना आयोजित करने में मदद की। राष्ट्रीय पोषण संस्थान हैदराबाद के पूर्व निदेश्क, वैज्ञानिक इस सहभागी कार्यक्रम को सफल बनाने के कर्त्ताधर्ता थे। उन्होंने वैयक्तिक तौर पर एक्सपोजर और इंटरएक्शन करनेवाले छात्रों को इसमें शामिल करने का प्रयास किया। वे आंगनवाड़ी कार्यकर्त्ताओं, शिक्षकों, गांव के प्रतिनिधियों और सरकारीकर्मियों के साथ गांव गये थे। छात्रों को पेडाचिन्तकुण्टा मंगापुर, प्रसिद्ध आम की पौधच्चाला और अन्य जिले स्थानीय धार्मिक स्थानों पर जाने का अवसर मिला था। युवाओं को भारत की आत्मा को नजदीक से खोज करने का अवसर मिला। इन गांवों ने उन्हें प्रकृति से सीखने की बुनियादी कला भी सिखाई। छात्रों के साथ चर्चा करते हुए प्राध्यापक और ग्रामीण बड़े श्री जी वी वी एस डी एस प्रसाद द व्हील सह संयोजक ने ग्रामीण ज़िदगी, पंचायत, जीवनशैली और ग्रामीणों की समस्याओं के अवलोकन पर चर्चाओं की शुरुआत की। वह ग्रामीणों के साथ हो रहे विभिन्न शोषणों को सामने लाए। उन्होंने इन समस्याओं के समाधान में आधुनिक तकनीकों के प्रयोग की संभावनाओं को रखा।

विकास का सार है युवा संवेदीकरण- युवा संसद
पूर्वोतर भारत की उपलब्ध चुनौतियों को ध्यान रखते हुए और युवाओं में इन चुनौतियों की संवेदना लाने की जरूरत को देखते हुए एक कार्यशाला का आयोजन असोम विश्वविद्यालय के दिप्हू परिसर में राष्ट्रीय ग्रामीण संस्थान हैदराबाद, मानव संसाधन विकास मंत्रालय भारत सरकार के युवा संवेदनशीलता की पूर्वोत्तर भारत की चुनौतियां स्थानीय योजनाएं और युवा संसद के सहयोग से किया गया।

यह दो दिवसीय सम्मेलन 1 और 2 सितम्बर 2009 को सहयोगी निदेशक डॉ बिकास चन्द्र दास, असोम विश्वविद्यालय राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा संयोजित किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्‌देश्य उनके दारा सामना की जा रही उन स्थानीय चुनौतियों के प्रति संवेदनशील बनाना था जो विकास के मुद्‌दों के प्राथमिक संदर्भ हैं।

कार्यशाला का उद्घाटन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दिप्हू के उपायुक्त मि.एम सी साहू आईएएस दारा किया गया। मि. साहू ने युवा संवेदनशीलता एक अवधारणा एक नवीन विचार के मुख्य तथ्यों की ओर ध्यान आकर्षित किया। प्रो. भूलेश्वर मेत, आदरणीय असोम विश्वविद्यालय दिप्हू परिसर के उपकुलाधिपति ने उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता की। अपने उद्घाटन भाषण में उन्होंने कहा कि कार्यशाला नवीन थी और पहली बार एनसीआरआइ के सहयोग से आयोजित हो रही थी। प्रो. थोम्बी सिंह (पूर्व उपकुलाधिपति मणिपुर विश्वविद्यालय) वर्तमान में कार्यशाला के अध्यक्ष के तौर पर कार्य रहे, ने मानवता के द्वारा सामना कर रही चुनौतियों का पेनोरोमिक चित्र रखा और इन चुनौतियों से सफलतापूर्वक सामना करने के लिए युवा शक्ति के उपयोग करने की भी बात की। एनसीआरआइ के प्रतिनिधि मि.एस सत्पथी ने एयूडीसी से युवाओं की संवेदनशीलता बढ़ाने वाले ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने के लिए कहा ताकि वे विभिन्न मायनों में देश के विकास की प्रक्रिया में भागीदार बन सकें। उन्होंने सूचित किया कि एनसीआरआइ पूर्वोत्तर क्षेत्र में ऐसे कार्यक्रमों को बड़े पैमाने पर विश्वविद्यालयों के छात्रों हेतु आयोजित करने में रूचि रखती है। राजनीति विज्ञान विभाग आसाम विश्वविद्यालय दिप्हू परिसर के रीडर डॉ खोकन चंद्रा दास ने प्रस्ताव पर धन्यवाद प्रस्ताव रखा।

सर्वश्रेष्ठ युवा संसद
आदरणीय जज मि.जे डी थंग राजनीति विज्ञान विभाग दिप्हू सरकारी कॉलेज और डॉ बिनायक दत्त, सहायक प्रो. इतिहास विभाग आसाम विश्वविद्यालय दिप्हू परिसर ने प्रतिभागी युवा सांसदों का मूल्यांकन किया और उनमें से तीन श्रेष्ठ प्रतिभागियों को चुना। मि. होकदर तरंग ने पहला स्थान पाया जिन्होंने प्रधानमंत्री के रूप में भाग लिया। मि. धोनीराम लेखे ने दूसरा और मि. देबाशीष दास ने संसद चर्चा में प्रतिभागियों में तीसरा स्थान प्राप्त किया। पहले, दूसरे और तीसरे प्रतिभागी को क्रमशः 150, 100 और 75 रुपये पुरस्कार स्वरूप दिये गये।
चक्र, राष्ट्रीय ग्रामीण संस्थान का एक भाग है जो कि गांधीवादी विचारों और क्रियाओं का पालन करता है। इस चक्र के अध्यक्ष गांधीवादी विद्वान और सर्वोदय नेता प्रो. जीवीवीएसडीएस प्रसाद हैं। चक्र, पूरे देश के उन गांधीवादी आश्रमों और गांधीवादी अध्ययन केन्द्रों के विकास के लिए कार्य करता है। इन सारी गतिविधियों के अलावा गरीबों के उत्थान और ग्रामीणों को गांधीवादी मूल्यों और सिद्धांतों के बारे में शिक्षित करता है।