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चरखा - द व्हील (गाँधीवादी विचारों का प्रसार और प्रचार केंद्र)

थोडा सा अभ्यास बहुत सारे उपदेशों से बेहतर है।” – महात्मा गांधी

एन.सी.आर.आई. के अधिदेश के अनुरूप में गांधीवादी अवधारणाओं के आधार पर व्हील को एक प्रसार केन्द्र के रूप में प्रारंभ करने (अनुप्रयोग) की कल्पना की गई थी। "चरखा" (व्हील) गांधीवादी जीवन के तरीके में शामिल गतिशीलता, उत्पादकता और आत्म निर्भरता और उपरोक्त सभी बातें कर्म योग (श्रम की गरिमा और आनंद) जैसे आदर्शों का प्रतीक है। मनुष्य जीवन प्रतिस्पर्धा और संचय पर आधारित भौतिक और आर्थिक स्वयंपूर्णता न होकर शांति और सहयोग के आधार पर बहुआयामी पहलुओं को दर्शाता है।

विभिन्न संस्थाओं की पहचान कर उनके साथ मिलकर उपयुक्त कार्यक्रमों की रूपरेखा बनाते हुए केन्द्र अपने लक्ष्यों को पूरा करने में लगा हुआ है। इस प्रक्रिया में गांधीवादी संस्थानों, अनुसंधान और अध्ययन केन्द्रों तथा गांधी विचारों में रूचि रखने वाले अन्य संस्थानों के साथ कार्य करना शामिल है। व्हील केन्द्र के प्रमुख कार्य शैक्षिक संस्थानों के साथ सहयोग और अच्छे संबंध बनाना और गांधीवादी संस्थानों के पुनरूद्धार और सशक्तिकरण के लिए सहयोग कार्यक्रम चलाना हैं।

2009 में अपने प्रारंभ से व्हील केन्द्र ने गांधीवादी विषयों और विचारों पर अनेक कार्यक्रम (संगोष्ठियाँ, कार्यशालाएं और संवाद) आयोजित किये हैं। केन्द्र अपनी एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में विभिन्न संस्थानों और विश्वविद्यालयों में गांधीजी एवं उनके सिद्धांतों और मूल्यों से संबंधित कार्य पर अनुसंधान कर रहे एम.फील. और पीएच.डी. विद्वानों को फैलोशिप और स्नातकोत्तर छात्रों को छात्रवृत्ति की प्रदान कर रहा है। शांति निर्माण और संघर्ष-समाधान के विभिन्न पाठ्यक्रमों और कार्यक्रमों को शुरू करने के प्रयास भी जारी है।

लक्ष्य और दूरदर्शिता :
गांधी जी ने हमें यह कह कर आश्वस्त किया है कि ‘‘मृत्यु के बाद भी मैं चुप थोड़े बैठने वाला हूँ ? मैं तो कब्र में से भी बोलता रहूँगा।’’ गांधीवादी विचार और शिक्षा समय की कसौटी पर खरी उतरी है। आज भी गांधीवादी सिद्धांतों में दुनिया के कई समस्याओं जैसे - सामाजिक, आर्थिक या राजनीतिक के समाधान मिलते है।

इसलिए इस वर्तमान समाज और परिस्थितियों में भी गांधीजी के विचारों की बहुत प्रासंगिकता है। इस समस्याग्रस्त समाज में एक बार फिर गांधी पर विभिन्न शोध कार्यक्रमों को महत्व मिल रहा है और लोग समस्याओं के समाधान गांधीवादी शिक्षा के रास्ते तलाश रहे हैं। इसीलिए भारत सहित विश्वभर में विभिन्न संस्थानों का गठन हुआ है जो कि गांधीजी के संदेशों का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। इस संबंध में कई संगोष्ठियों और कार्यशालाओं का आयोजन किया गया। विश्वभर के कई सुप्रसिद्ध विद्वानों द्वारा गांधी पर लिके गये साहित्य भी प्रचुर मात्रा में है। इन सभी प्रयासों के बावजूद वर्तमान परिप्रेक्ष्य में जब गांधीवादी सिद्धांतों और कार्यों को लागू करने का बात होती है तो कई उल्लेखनीय कमियां सामने आ जाती हैं। इस विषय पर समग्र दृष्टिकोण से समाधान पाने हेतु राष्ट्रीय ग्रामीण संस्थान परिषद ने ‘‘चरखा’’ (द व्हील) के नाम से गांधीजी के विचारों, प्रयासों और सिद्धांतों के प्रचार और प्रसार के लिए इस विशेष केन्द्र को स्थापित किया है।

उद्देश्य :

  • समग्र ग्रामीण हित के लिए वर्तमान समय की बढ़ती जरूरतों के अनुरूप गांधीवादी विचारों को पुनर्चलित करना और उद्दीपित करना।
  • विभिन्न गांधीवादी संस्थानों के कार्यों में कमियों की पहचान कर उपयुक्त समाधान पर सुझाव देना।
  • गांधीवादी दर्शन के अनुप्रयोग पर कार्य कर रहे संस्थानों को सहायता देकर मजबूती प्रदान करना।
  • सामाजिक और ग्रामीण विकास के लिए क्रिया-अनुसंधान को एक माध्यम के रूप में प्रयोग करने वाले संस्थानों और व्यक्तियों (गांधीवादी विद्वानों और समाज शास्त्रीयों को अध्येतावृत्ति प्रदान करते हुए) का समर्थन और मार्गदर्शन करना।

कार्यक्रम :

  • ग्रामीण भारत के संदर्भ में गांधीवादी दर्शन और क्रिया अनुसंधान।
  • गांधीवादी साहित्य के प्रलेखन और संरक्षण कार्य कर गांधीवादी दर्शन और विचारों का प्रसार-प्रचार कर रही संस्थाओं को सहायता देना।
  • महात्मा गांधी द्वारा लिखित और उन पर लिखे गए किताबों को खरीदने और पुस्तकालयों की स्थापना हेतु सहायता प्रदान करना।
  • गांधीवादीओं, गांधीवादी आश्रमों, अध्ययन केन्द्रों, गांधी केन्द्रों और संग्रहालयों का संग्रह तैयार कर उन्हें निरंतर बनाए रखना।
  • गांधीवादी दर्शन के निरंतर प्रभावी प्रसार के लिए गांधीवादी आश्रमों और संस्थानों को पुनरुत्थान करना।
  • गांधीवादी दर्शन और शांति शिक्षा के पाठ्यक्रमों को बढ़ावा देना।
  • सुप्रसिद्ध विद्वानों की गोष्टि का आयोजन करना और कार्यशालाओं, संगोष्ठियों, अभ्यास शिविरों, शांति मुहिमों के आयोजन को सहायता देना।
  • राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ साझेदारी बनाना।

वर्तमान गतिविधियाँ :

  • चरखा (व्हील) केन्द्र द्वारा देशभर के विभिन्न गांधीवादी संस्थानों के साथ आदान-प्रदान के प्रयास जारी है।
  • उभरते पर्यावरण के अनुरूप समाकलित होने के अपने उद्देश्य से कई कार्यक्रमों का आयोजन करना।
  • विभिन्न गांधीवादी विद्वानों, कार्यकर्ताओं और विचारकों के बहुमूल्य योगदान से मूल और परिधीय गतिविधियों के लिए अभिगम और तरीकों का अभिकल्पन करने के लिए परामर्श सत्रों का आयोजन कर रहा है।
  • शांति और संघर्ष समाधान पर कार्यक्रमों की शुरूआत करने के लिए विभिन्न संस्थानों को समर्थन दिया गया। इसके अलावा गांधीवादी दर्शन पर दूरस्थ पाठ्यक्रम चालू करने हेतु इग्नू, आई.सी.पी.आर. और नेशनल लॉ स्कूल के साथ सहमति ज्ञापन पर राजी हुए।
  • गांधीजी की मूल्यों की विरासत को आगे ले जाने वाली कई संस्थानों को समर्थन दिया जा रहा है।

केन्द्र गांधीवादी विचारों और सिद्धांतों के अनुप्रयोग पर अनेक कार्यक्रमों के द्वारा विशेष ध्यान केंद्रित करता आ रहा है। बदलते समय के अनुरूप केन्द्र के कार्यक्षेत्र को ढालते हुए उसकी गतिविधियों को एक निश्चित दिशा देने के लिए एक समिति का गठन किया गया। इस समिति के सदस्यों में एन.सी.आर.आई. के उपाध्यक्ष, श्री पी.वी. राजगोपाल, आचार्य नागार्जुना विश्वविद्यालय के पूर्व उप-कुलपति, प्रो. सी.वी. राघवुलु, हैदराबाद विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग के प्रमुख डॉ. आर.रघुरामा राजु, शिवाजी विश्वविद्यालय कोल्हापुर के सेवानिवृत्त प्रो. श्री अशोक चौसलकर, और ए.एन. सिन्हा इन्स्टिट्यूट ऑफ सोशल स्टडिज़ के निदेशक डॉ. डी.एम. दिवाकर शामिल है। समिति की पहली बैठक 31 दिसम्बर, 2010 को एन.सी.आर.आई. में आयोजित की गई थी जिसमें कई विषयों पर चर्चा हुई और महत्वपूर्ण विचार उभरे।

बाएं से दाएं : डॉ. डी.एम. दिवाकर, प्रो. ए.रघुराम राजु, श्री पी.वी. राजगोपाल, डॉ. एस.वी. प्रभात, और एन.सी.आर.आई. के अन्य पदाधिकारी।.

आयोजन :

1) सेंटर फार स्टडि आफ सोसायटी एण्ड सेक्युलरीज़म (सी.एस.एस.एस.) के अध्यक्ष, डॉ. असग़र अलि इंजीनियर और सी.एस.एस.एस., मुम्बई के कार्यकारी निदेशक और समन्वयक, डॉ. वी.मोहन राल्लपल्ली ने 1 फरवरी, 2011 को एन.सी.आर.आई. का दौरा किया।
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एन.सी.आर.आई. के अध्यक्ष के साथ वार्तालाप करते हुए डॉ. असग़र अलि अंजीनियर और डॉ. वसुन्धरा मोहन। संगोष्ठी का उद्घाटन करते हुए श्री अनिल नौरिया, बाएं से डॉ. भारती पाटिल, श्री सुब्रतो मुखर्जी, श्री नटवर ठक्कर, श्री दत्ताजी शिंदे, प्रो. एन.जे. पवार।

2) कोल्हापुर स्थित शिवाजी विश्वविद्यालय के गांधी अध्ययन केन्द्र ने 12 से 12 मार्च, 2011 के दौरान ‘मेकिंग आफ द महात्मा : एम.के गांधी इन साउथ अफ्रीका’ विषय पर एक अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया।

संगोष्ठी को संबोधित करते हुए महात्मा गांधी की पडपोती प्रो. उमा मेस्त्री-धुपेलिया। बाएं से दाएं बैठे हुए : प्रो.स्कॉट कैफेरा, श्रीमती सुशिला रामस्वामी और श्री विजय नाईक महाराष्ट्र के माननीय मुख्य मंत्री श्री पृथ्विराज चौहान विशेष व्याख्यान देते हुए। बाएं से दाएं बैठे हुए : आंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी की संयोजक डॉ. भारती पाटिल, शिवाजी विश्वविद्यालय के उप कुलपति प्रो. एन.जे. पवार, महाराष्ट्र सरकार के मंत्री श्री हसन मुश्रिफ और सतेज पाटिल

10 मार्च को प्रमुख व्याख्यान निम्न व्यक्तियों के थे :
श्री अनिल नौरिया – दक्षिण अफ्रीका में सत्याग्रह
प्रो. मीना देशपांडे – दक्षिण अफ्रीका में भारतीय पहचान

11 मार्च को प्रमुख व्याख्यान निम्न व्यक्तियों के थे :
डॉ. वाई.पी. आनन्द – सत्याग्रह
श्री तुषार गांधी – बापू और उनका परिवार
श्री विजय नाईक – दक्षिण अफ्रीका में सत्याग्रह : समकालीन प्रासंगिकता
प्रो. उमा मेस्त्री-धुपेलिया – गांधी : एक पत्रकार
जगदम्बा : रोहिणी हटटंगडी द्वारा लोक कला केन्द्र में सादर लघु नाटिका

12 मार्च को प्रमुख व्याख्यान निम्न व्यक्तियों के थे :
प्रो. उमा मेस्त्री-धुपेलिया – गांधी आश्रम
प्रो. उषा ठक्कर – हिंद स्वराज
महाराष्ट्र के माननीय मुख्य मंत्री श्री पृथ्विराज चौहान द्वारा एक विशेष व्याख्यान
श्री तुषार गांधी समापन समारोह के मुख्य अतिथि थे।

3) नई दिल्ली स्थित जामिया मिलिया इस्लामिया (केन्द्रीय विश्वविद्यालय) के सेंटर फार कल्चर, मीडिया एण्ड गर्वनैन्स द्वारा एन.सी.आर.आई. के सहयोग से ‘री-थीकिंग गांधी : ए कम्युनिकेशन परस्पेक्टिव’ विषय पर एक अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का 22 से 23 मार्च 2011 को आयोजन किया गया।
गांधीजी द्वारा साम्राज्यवादी प्रशासन और सरकार के खिलाफ आवाज उठाने के लिए भारतीयों को प्रोत्साहित करने के लिए संदेश आम लोगों तक पहुँचाने में इस्तेमाल किये गए संचार के तरीके और रणनीतियों पर संगोष्ठी में प्रकाश डाला गया। गांधीजी ने अपना संदेश लोगों तक पहुँचाने के लिए सांकेतिक भाषा का कैसे इस्तेमाल किया यह दर्शाने का यह एक प्रतीकात्मक प्रदर्शन है।

संगोष्ठी के दौरान छः सत्रों में 25 विद्वानों ने अपने शोध पर विषयवस्तुओं का सादरीकरण किया। सेंटर फार कल्चर, मीडिया एण्ड गर्वनैन्स, जामिया मिलिया इस्लामिया के प्रो. बिश्वजीत दास ने संगोष्टी की विषय का परिचय कराया और प्रमुख वक्ताओं और प्रतिभागियों का स्वागत किया

सी.एस.एस (सूरत) के श्री सदन झा, श्री ऑलिवर एरिफॉन, जामिया मिलिया इस्लामिया के श्री मधुकर उपाध्याय और पुणे विश्वविद्यालय के श्री केवल कुमार। जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में शामिल प्रतिभागी।

संपर्क :
परियोजना अधिकारी
दूरभाष : 040-23422120
ई-मेल : potw@ncri.in

परियोजना सहायक
दूरभाष :  040-23422120
ई-मेल : thewheel@ncri.in