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स्वामी विवेकानंद युवोदय कार्यक्रम केन्द्र 

ऐसा माना जाता है कि भारत की जनसंख्या का 40% से अधिक हिस्सा 15 से 35 कि उम्र के युवा पीढ़ी है। यह हिस्सा देश के अति सक्रिय और गतिशील है जो कि एक बहुमूल्य श्रमशक्ति है। युवा पीढ़ी  मेँ वो शक्ति है जिससे कि हमारा देश एक विकासशील देश  से एक विकसित देश बन सकता है। आज का युवा  एक गरीबी, बेरोज़गारी, असमानता और मनुष्य द्वारा मनुष्य का शोषण रहित देश  की कामना करता है।

युवाओं का एक बडा हिस्सा न केवल बेरोज़गार है बल्कि वह अप्रयोज्य भी है। युवाओं में बेरोज़गारी देश की सबसे बड़ी समस्या है, जिसके दूरगामी और नकारात्मक परिणाम हो सकते है। इन सभी बातों का युवाओं पर मानसिक तौर पर असर होता है, जिससे की वो उनमें आत्मविश्वास की कमी होती है जिससे वे अपने भविष्य के बारे में कडवाहट व्यक्त करते हैं। इसीलिये, जनसंख्या के इस महत्वपूर्ण भाग को अपने क्षमतानुसार कार्य निर्वहन करने के लिए एक नीतिबद्ध तरीके से कई बहु-आयामी कार्यक्रमों के द्वारा सशक्त बनाने की जरूरत है।

एन.सी.आर.आई. में स्वामी विवेकानन्द युवोदय कार्यक्रमों के केन्द्र का मूल :
इसी को ध्यान में रखते हुए एन.सी.आर.आई. ने अपने विस्तरण सेवाओं के अंतर्गत ग्रामीण युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर उपयुक्त कार्यक्रमों पर ध्यान केंद्रीत किया है। ग्रामीण युवाओं और प्रमुख रूप से अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ चुके युवाओं में मूल रोजगार कौशल विकसित करना और औपचारिक/अनौपचारिक शिक्षा या जीविकोपार्जन शिक्षण/प्रशिक्षण देते हुए उनमें व्यक्तिगत दक्षता का विकास करना ही एन.सी.आर.आई. के प्रमुख उद्देश्य हैं।

शुरूआत के तौर पर अप्रैल 2009 में युवा संवेदीकरण कार्यक्रमों को प्रारंभ किया गया। इस विषय में व्यावहारिक दृष्टिकोण लाने के लिए एन.सी.आर.आई. के पदाधिकारीयों ने देश के कई ग्रामीण संस्थान और संभावित गैर सरकारी संगठन जाकर उनके प्रतिनिधियों से भेंट कर ग्रामीण युवाओं और उनकी रोजगार क्षमता से संबंधित कई समस्याओं का अध्ययन किया। इस तरह के कई भेंट वार्ताओं और परामर्शों के उपरांत एक प्रायोगिक कार्यक्रम की संरचना की गई, जिसे समय के साथ विश्वविद्यालयों, व्यावसायिक संस्थानों और गैरसरकारी संगठनों में भी प्रचलित किया जाएगा। मई 2009 में इन्फोसिस नेतृत्व संस्थान, मेदक, आंध्र प्रदेश के भागीदारी से एक प्रयोगात्मक युवा संवेदीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें मेदक जिले के कई शैक्षणिक संस्थानों के छात्रों ने भाग लिया। उसके उपरांत लगभग 12 राज्यों के अनेक विश्वविद्यालयों, ग्रामीण संस्थानों और गैरसरकारी संगठनों की भागिदारी से कई युवा संवेदीकरण कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।

फलस्वरूप एन.सी.आर.आई. ने ग्रामीण उन्नति के लिए युवा आंदोलन (युक्रा) कार्यक्रम प्रारंभ किया, जिसमें युवाओं को सामाजिक कार्य और प्राकृतिक आपदा प्रबंधन के कार्यों की ओर प्रोत्साहित किया जाता है। इस कार्यक्रम का अक्तूबर 2009 में गांधी जयंती के उपलक्ष्य में शुभारंभ हुआ था।

इन दो कार्यक्रमों की सफलता और देशभर के कई ग्रामीण संस्थानों और गैरसरकारी संगठनों के कई आवेदनों को ध्यान में रखते हुए एन.सी.आर.आई. ने स्वामी विवेकानंद के नाम पर युवाओं पर आधारित कार्यक्रमों के एक केन्द्र की स्थापना की ताकि इसके माध्यम से युवाओं का सशक्तीकरण करते हुए उनको स्वयं और समुदाय के विकास से जोड़ा जा सके और उनकी ऊर्जा को उपयोगी बनाते हुए राष्ट्र निर्माण में युवाओं का योगदान मिल सके।

उद्देश्य :

  • युवाओं को आजीवन सीखने का अवसर प्रदान करना जिससे वे उपयोगी, आधुनिक विचारधारा वाले और सार्थक व्यक्तियों के रूप में उभरें।
  • विभिन्न सामाजिक और शैक्षिक गतिविधियों के माध्यम से युवाओं के लिए रोजगार की संभावनाएं बढाना और उनके व्यक्तित्व का निर्माण करना।
  • सामुदायिक विकास में नेतृत्वकारी भूमिका के लिए युवाओं में विभिन्न क्षमताओं का विकास करना।
  • युवा और समुदाय दोनों के हित के लिए युवाओं को समुदाय से जोड़कर एक साझेदारी का विकास करना।
  • संपूर्ण विश्व में भाई-चारे के मूल्यों को बढ़ावा देना और मानव कल्याण की दिशा में स्वैच्छिक प्रयासों के लिए प्रोत्साहित करना।

लक्षित समूह :

क. छात्र युवा
  • हाई स्कूल और कॉलेज छोड़े हुए छात्र
  • व्यावसायिक डिग्री पढ रहे छात्र
  • गैर-तकनीकी क्षेत्र के छात्र
  • जल्द ही अपनी पढा़ई पूरी करने वाले छात्र
  • ग्रामीण परिवेश से अवगत छात्र
ख. गैर छात्र युवा
  • बुनियादी शिक्षा से वंचित युवा
  • विभिन्न व्यवसायिक/जीवन-कौशल गतिविधियों को सीख रहे युवा।
  • कृषि और कृषि संबंधी अन्य गतिविधियों से जुड़े युवा
  • स्थानीय कला, दस्तकारी, खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों में संलग्न युवा
  • सामुदायिक गतिशीलता की गतिविधियों से जुड़े युवा
ग. विभिन्न शारीरिक बाधाओं से ग्रसित युवा

एस.वी.सी.वाई.पी. के अंतर्गत प्रस्तावित कार्यक्रम :

  1. युवा संवेदीकरण कार्यक्रम : शहरों में स्थित अनेक व्यावसायिक संस्थानों में प्रविष्ट युवाओं को ग्रामीण परिवेश से अवगत कर उन्हें संवेदनशील बनाना। केन्द्र का मुख्य उद्देश्य युवाओं के अंदर ग्रामीण क्षेत्र की संभावनाओं को समझने और उन्हें सराहने के लिए उन्हें प्रोत्साहित करना है, ग्रामीण विकास, संस्कृति और लोकाचार के प्रभाव को बनाने वाले सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों के विभिन्न कार्यक्रमों पर इसका का ध्यान केंद्रित है।

  2. ग्रामीण उन्नति के लिए युवा अभियान (युक्रा) गहन प्रशिक्षण शिविरों और व्यावहारिक प्रदर्शन के माध्यम से ग्रामीण युवाओं को समुदायिक/सामाजिक क्रिया और आपदा प्रबंधन की दिशा में लाना।

  3. युवा ग्रामीण इंटर्नशिप कार्यक्रम (वाई.आर.आई.पी.) : मौजूदा शैक्षणिक कार्यक्रमों की कमियों को पूर्ण करने हेतु विभिन्न क्षेत्रों में व्यावहारिक प्रशिक्षण, विस्तरण सेवाओं से परिचय और व्यावहारिक अनुभव प्रदान करते हुए युवाओं के लिए लाभकारी रोजगार या उनकी उद्यमशीलता को बढ़ावा देना ताकि वे सक्षम हो सकें।

  4. युवोदय केन्द्र (वाई.के.) : विशेषतः ग्रामीण युवाओं जो औपचारिक/अनौपचारिक शिक्षा या आजीविका शिक्षा/प्रशिक्षण से विमुख हुए है उन पर ध्यान केंद्रित करते हुए उनका सशक्तिकरण और उन्हें स्वयं तथा समुदाय के विकास में जोड़ने के उद्देश्य से युवोदय केन्द्रों की स्थापना हुई। केन्द्र न केवल जीवनभर शिक्षा और कौशल संवृद्धि को प्रोत्साहित करता है बल्कि सांस्कृतिक संवर्धन, पारंपरिक कला औऱ खेल, कैरियर परामर्श, लघु प्रयोगशाला, सेतु पाठ्यक्रम, युवा क्लब, नाटक, लोक कला, ग्रामीण खेलों आदि को भी युवा सशक्तिकरण में प्रयोग में लाने की चेष्टा करता है।

  5. युवा सहभागिता क्रिया अनुसंधान (वाई.पी.ए.आर) : सामुदायिक अनुसंधान से जुड़कर सामाजिक समस्याओं से परिचित होने और उनको सुलझाने का अवसर ग्रामीण युवाओं को यह कार्यक्रम प्रदान करता है। यह अनुसंधान से उनको विभिन्न समस्याओं को क्रमबद्ध क्रिया कार्यक्रमों का विकास कर उन्हें सुलझाने मददगार साबित होगा।

अपेक्षित परिणाम:

  • युवाओं में रोजगार क्षमता (व्यावसायिक/पेशेवर प्रशिक्षण और जीवन कौशल के माध्यम से) बढ़ेगी।
  • ग्रामीण युवाओं को मुख्यधारा की उच्चतर शिक्षा में शामिल होंगे।
  • स्थानीय खेल, कला और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के कार्यों में अधिक मात्रा में युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित होगी।
  • शारीरिक रूप से विकलांग युवाओं में आत्मविश्वास बढ़ेगा।
  • युवाओं में व्यावहारिक दृष्टिकोण, उत्तरदायित्वों की समझ, निस्वार्थ सेवा और स्वैच्छिक कार्य को बढ़ावा मिलेगा।
  • सामाजिक विभाजन को दूर होगा और समाज में शांति और सद्भाव की दिशा में कार्य होगा।

केन्द्र के विभिन्न गतिविधियों के अंतर्गत क्षेत्र :

आयोजन :
केन्द्र द्वारा 22 से 26 फरवरी 2011 के दौरान हिमाचल प्रदेश स्थित सेंटर फार सस्टेनेबल डेवलपमेंट (सी.एस.डी.) के भागीदारी से दो युवा संवेदीकरण कार्यशालाओं का आयोजन किया गया। ‘युवा नेतृत्व और ग्रामीण उन्नति’ इन कार्यशालाओं का विषय था। सुंदरनगर, मण्डी जिले (हिमाचल प्रदेश) के जवाहर लाल नेहरू राजकिय अभियांत्रिकी कालेज में 22 और 23 फरवरी के दौरान पहली कार्यशाला का आयोजन किया गया। और जबकि दूसरी कार्यशाला का आयोजन 25 और 26 फरवरी, 2011 को मण्डी जिले के नेरचौक में स्थित अभिलाषी ग्रूप ऑफ इन्स्टिट्यूशन में किया गया। हिमाचल प्रदेश राज्य के तकनीकी शिक्षा विभाग के निदेशक श्री विजय चन्दन की उपस्थिति से भी कार्यशालायें अधिक सफल हुई। एस.वी.सी.वाई.पी. के समन्वयक श्री. डैनिएल ने परिचय सत्रों का संचालन किया। सुंदरनगर की कार्यशाला में जवाहर लाल नेहरू राजकिय अभियांत्रिकी कालेज, राजकिय पॉलिटेक्निक कॉलेज, सिरदा इन्स्टिट्यूट ऑफ इंजीनियरींग एण्ड इमर्जिंग टेक्नोलोजी, सिरदा महिला पॉलिटेक्निक कॉलेज आदि के अभियांत्रिकी एवं प्रबंधन के लगभग 80 छात्रों ने भाग लिया। इसके अलावा हाईजिया फूड्स के प्रबंध निदेशक, श्री विवेक बसंधराय, शिवा फूड्स प्रा. लि. के प्रबंध निदेशक, श्री विजय पटियाल, एच.पीए.यु. (पालमपुर) के निदेशक डॉ. आर.सी. ठाकूर, सी.एस.डी. के निदेशक श्री जितेन्दर वर्मा ने भी प्रथम कार्यशाला में भाग लिया और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के अपने अनुभवों को साझा किया। श्री बसंधराय ने सफल उद्यमी बनने के लिए उन्होंने किस तरह की समस्याओं का सामना किया इस बारे में अपने विचार व्यक्त किये। डॉ. ठाकूर ने भारत में ग्रामीण उद्यमशीलता और ग्रामीण स्तर पर व्यापार को बढ़ावा देने के लिए सरकारी योजनाओं पर एक सादरीकरण दिया। श्री विजय पटियाल ने ग्रामीण क्षेत्रों के खाद्य प्रसंस्करण इकाईयों के बारे में बताया। श्री जितेन्दर वर्मा ने ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रामीण पर्यटन, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, जैविक खेती, वानिकी, पशुपालन और कचरे से ऊर्जा उत्पादन में उपलब्ध अवसरों के बारे में प्रतिभागियों को समझाया।

इसके उपरांत छात्रों को सुंदरनगर स्थित अप्रोप्रिएट टेक्नॉलॉजी सेंटर (ए.टी.सी.) को ले जाया गया, जहाँ पर उनको कई स्थानीय तकनीकों जैसे सौर ताप, चूहेदानी, चिनाई, पाइन नीडल ब्रिकेट, हल, इत्यादि के संबंध में जागृत किया गया। दूसरी यात्रा के दौरान महादेव ऊनी उद्योग और शिव खाद्य उद्योग को भ्रमण यात्राओं ने छात्रों को ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर ऐसे उद्योगों के प्रभाव के बारे में जागरूकता पैदा करने में मदद की। अभियंता श्री पवन शर्मा, जे.एन. राजकिय अभियांत्रिकी कॉलेज, सुंदरनगर के प्राचार्य एम.एल. मोडगील ने सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान किये और एन.सी.आर.आई. के श्री डैनिएल और सी.एस.डी. के श्री जितेन्दर वर्मा की कार्यशाला के आयोजन के लिए सराहना की।

दूसरी कार्यशाला का आयोजन मण्डी जिले के नेरचौक में स्थित अभिलाषी ग्रूप ऑफ इन्स्टिट्यूशन में किया गया। टी.आर. अभिलाषी अभियांत्रिकी और प्रौद्योगिकी संस्थान, टांडा और अभिलाषी प्रबंधन अध्ययन संस्थान, नेरचौक के बी.टेक, एम.बी.ए., बी.बी.ए., बी.सी.ए. पाठ्यक्रम के लगभग 77 छात्रों ने इस कार्यशाला में भाग लिया। अन्य प्रतिभागियों में अभिलाषी ग्रूप के अध्यक्ष डॉ. आर.के अभिलाषी, यू.एस.पी. हाइड्रोपावर के प्रबंध निदेशक श्री प्रणव ठाकूर, एच.पी.एस.सी. बैंक के वरिष्ठ प्रबंधक श्री जे.आर. भारद्वाज और एच.पी.ए. पालमपूर, हिमाचल प्रदेश के सेवानिवृत्त निदेशक डॉ. आर.सी. ठाकूर शामिल थे।
कार्यशालाओं के दौरान निम्न विषयों पर चर्चा की गई :

    1. ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के जीवनमान को सुधारने के लिए संसाधनों का जुटाव करना।
    2. युवाओं के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रामीण पर्यटन, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, जैविक खेती, वानिकी, पशुपालन और कचरे से ऊर्जा तैयार करने जैसे क्षेत्रों में उपलब्ध अवसर।
    3. लघु पनबिजली संयंत्र की स्थापना।
    4. स्वसहायता समूहों को बनाना और उन्हे प्रभावी रूप से कार्यान्वित करना।
    5. ग्रामीण उद्यमशीलता और उससे संबंधित विभिन्न विषय।

एक दो दिवसीय कार्यक्रम के दौरान, छात्रों ने हिमालय टिन्ड फूड एण्ड वेजीटेबल्स का भ्रमण किया और खाद्य प्रसंस्करण से संभधित पूर्ण जानकारी हासिल की। दूसरी यात्रा बाडसू ग्राम पंचायत कि थी जहाँ की महिलाओं ने स्वसहायता समूह का गठन कर हैण्डबैग, सजावटी सामान, चटनी, अचार, मुरब्बा, नमकीन, शिरा आदि जैसे अनेक उत्पाद तैयार करती हैं। इस दौरे से छात्र अधिक संतुष्ट थे और उन्होंने इस कार्यक्रम को अति सूचनादायक बताया।

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संपर्क :

समन्वयक
दूरभाष : 040-23422107
ई-मेल : cysp@ncri.in 
परियोजना सहायक
दूरभाष : 040-23422107