ग्रामीण संस्थानों को एकीकृत सूचना तथा ज्ञान सेवायें प्रदान करने हेतु दसवी योजना के दौरान ग्रामीण सूचना संसाधन केन्द्र (आर.आर.आई.सी.) की एक ज्ञान केन्द्र के रूप में स्थापना की गई। क्षेत्र विशेष सूचना सेवाओं से ग्रामीण संस्थानों को उच्चतर शिक्षा में व्यवस्थित तथा वैज्ञानिक निर्णयन में समर्थन कर, उन्हें मूल विकास में सक्रीय भूमिका निभाने के लिए ज्ञान केंद्रों में स्थापित करना यह आर.आर.आई.सी. का मुख्य उद्देश्य है।
ग्रामीण शिक्षा और विकास से व्यापक रूप से जुड़े ग्रामीण संस्थानों को ज्ञान के व्यापक जगत में प्रवेश करने हेतु नवीनतम सूचनाओं के साथ आवश्यक सूचना सेवायें उपलब्ध कराके, इस ज्ञान का उपयोग विभिन्न अनुप्रयोगों में करने के लिए उन्हें सक्षम बनाना। ऐसी प्राप्त जानकारी प्रत्यक्ष रूप से आरंभिक स्थिति से संबंधित, लाक्षणिक और उपायोन्मुख होगी। कार्यों की व्यापकता और ग्रामीण परिवेश से जुड़े जटिल मुद्दों के आवश्यक संयोजन में एक व्यापक पर्यावरण और स्रोतों की बहुलता को जोड़ा जाना है। अपेक्षित सूचनाओं को प्राप्त करने के लिए ऐसे संगठनों को अधिक संख्या में आर.आर.आई.सी. से जोड़कर इस कार्यक्रम के कार्यान्वयन को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
अब तक एक अवधारणा के रूप में रहे आर.आर.आई.सी. को परिचालित करने के लिए एक परियोजना के तहत एन.सी.आर.आई. द्वारा आर.आर.आई.सी. के प्रलेख की अभिकल्पना, विकास और कार्यान्वयन के लिए एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने का कार्य विप्रो लिमिटेड को सौंपा गया। इसी के एक भाग के रूप में ग्रामीण संस्थानों, विश्वविद्यालय, विकास संस्थान और सरकारी संगठन जैसे विभिन्न हितधारकों से जानकारी और सुझाव लेने के लिए कई क्षेत्रीय परामर्श कार्यशालाओं और विचारोत्तेजक चर्चा सत्रों का आयोजन किया गया। देश भर के ग्रामीण संस्थानों की सूचना आवश्यकताओं का आकलन करने एवं आर.आर.आई.सी. द्वारा उपयुक्त मूल्यवर्धित जानकारी सेवाओं की अभिकल्पना करने के लिए उन्हें एक विस्तृत प्रश्नावली दी गई।
आगे पढ़े
दृष्टि (विज़न)
ग्रामीण संस्थानों को क्रमबद्ध, वैज्ञानिक तथा मूल्यवर्धित सूचना सेवाओं और उपायों से सुसज्जित करके ग्रामीण क्षेत्रों में एकीकृत ग्रामीण उच्च शिक्षा के लिए उन्हें ज्ञान केंद्रों के रूप में स्थापित करना।
लक्ष्य (मिशन)
ग्रामीण शिक्षा और सूक्ष्म-नियोजन के लिए क्रमबद्ध और वैज्ञानिक निर्णयन में समर्थन करने हेतु संसाधन सूचना प्रणाली का निर्माण।
उद्देश्य
- एकीकृत ग्रामीण शिक्षा के विकास को सुनिश्चित करने में ग्रामीण संस्थानों को सक्षम बनाने हेतु क्रमबद्ध और वैज्ञानिक सूचना में समर्थन प्रदान करते हुए उन्हें निर्णयन क्षमता प्रणाली के रूप में कार्यान्वित करना।
- ग्रामीण संस्थानों को सक्षम बनाने हेतु सूचनाओं की कमी की पहचान कर उपरोक्त सूचना सेवायें प्रदान करना।
- ग्रामीण लोगों और उनकी जरूरतों के सूचना संग्रह (डेटाबेस) को विकसित करना।
केन्द्र-बिन्दु
वर्तमान समय में शिक्षा, स्वास्थ्य, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, उपयुक्त प्रौद्योगिकी, आजीविका, कृषि, संस्थानों का विकास, सामुदायिक भागिदारी और जागरूकता इत्यादि क्षेत्रों में ग्रामीण संस्थान कार्य कर रहें हैं। उनके द्वारा समुदायों को विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों के पूरक अनेक सेवायें भी प्रदान की जा रही हैं। इसी सन्दर्भ में आर.आर.आई.सी. के सेवा वितरण प्रणाली अभिकल्पन चित्र निम्नवत है।
आर.आर.आई.सी. सूचना सेवा अभिकल्पन
केन्द्रीत प्रभाग
- कृषि तथा संबद्ध कार्यकलाप
- ग्रामीण प्रौद्योगिकी
- आजीविका
- ग्रामीण स्वास्थ्य
- ग्रामीण उद्यमशीलता
|
प्रमुख क्षेत्र
- ग्रामीण उच्च शिक्षा
- नई तालीम
- कृषि/कारिगर/प्रक्रियन
- कौशल प्रशिक्षण
- उभरते उद्योग एवं प्रौद्योगिकी
- सूक्ष्म नियोजन
- शांति और संघर्ष समाधान
|
ग्रामीण संस्थानों की सेवायें
- पाठ्यक्रम एवं उपक्रम
- परामर्श सेवायें
- प्रशिक्षण तथा क्षमता निर्माण
- विस्तरण सेवायें
- संलग्नता (नेटवर्किंग)
- अनुसंधान और विकास
- परिवर्तन कारकों को प्रतिपुष्टि
|
आर.आर.आई.सी. सेवायें
- वैज्ञानिक सूचना
- निर्णयन समर्थन
- मूल्याधारित सूचना
- कार्यक्रम कार्यान्वयन
|
समाधान संविभाग
|
|
उपरी चित्रानुसार आर.आर.आई.सी. के सूचना और ज्ञान सेवाओं का केन्द्र ग्रामीण संस्थानों के विषयगत क्षेत्र/केन्द्रीत प्रभागों की पहचान करने और सूचना समर्थन सेवाओं के संच के आधार पर अभिकल्पित होगा। यह धारणा है कि सूचना समर्थन सेवाओं को जब सुस्पष्टता से वितरित किया जायेगा तब ग्रामीण संस्थानों की सेवा वितरण क्षमता पर सीधा असर पड़ेगा। अंततः समाधान संविभाग में चर्चित पद्धतियों के माध्यम से इन सूचना सेवाओं को ग्रामीण संस्थानों को वितरित किया जायेगा।
देश भर के ग्रामीण संस्थानों के परामर्श के माध्यम से तथा विशेषज्ञों, विकास क्षेत्र के लोगों से प्राप्त क्षेत्रीय परामर्श और सुझावों पर आधारित आर.आर.आई.सी. के अभिकल्पन, विकास और कार्यान्वयन के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डी.पी.आर.) बनाई गई है।
समर्थन के कार्यमूलक क्षेत्र
- प्रशिक्षण : नेतृत्व, आजीविका संवर्धन और व्यावसायिक तथा उद्यमशीलता कौशल।
- शिक्षा : पाठ्यक्रम विकास, आवश्यकता आधारित एवं उपयुक्त व्यावसायिक/कौशल विकास उपक्रमों का अभिकल्पन।
- सूचना : आजीविका, प्रशिक्षण और व्यावसायिक उपक्रम, सरकारी योजनायें, इत्यादि के बारें में सूचना प्रदान करना, सामाजिक आर्थिक-संकेतकों के समुदाय डेटाबेस, स्थानीय और प्राकृतिक संसाधन, नक्शे आदि का रखरखाव।
- प्रौद्योगिकी : स्वदेशी/स्थानीय प्रौद्योगिकियों का प्रसार और पहचान करना, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, ग्रामीण उत्पादों के मध्यवर्ती प्रौद्योगिकियों इत्यादि के माध्यम से सुधार करना।
- प्रक्रियन : निर्णयन, निगराणी तथा मूल्यांकन के लिए तकनीकी सहायता।
सेवायें
आवश्यक सेवाओं में शामिल हैं :
- सलाहकारी/परामर्शी सेवाएं
- मार्गदर्शन और संप्रेषण सेवाएं
- कौशल विकास, व्यावसायिक प्रशिक्षण, रोजगार, उद्यमशीलता, ग्रामीण उत्पादों का विपणन, आदि से संबंधित आवश्यकता आधारित जानकारी सेवायें
- उपयोगकर्ता समूहों, नवीन आविष्कारकों और विभिन्न कार्यात्मक क्षेत्रों में उद्यमियों की पहचान जैसी मूल्य वर्धित सेवायें
- हितधारकों के लिए आवश्यकता आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन
अपेक्षित परिणाम
- ग्रामीण क्षेत्रों में ज्ञान संपर्क
- ग्रामीण उच्च शिक्षा सुधार / कौशल विकास / प्रौद्योगिकी के लिए पाठ्यक्रम अभिकल्पन में सहायता
- अपसेवित, असेवित और दूरस्थ क्षेत्रों के लिए जरूरत के आधार पर जानकारी और सेवाओं का प्रचार-प्रसार
- प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए एक मंच बनाना
- बेहतर कौशलवाले कार्यकर्ता
- परियोजनाओं के निर्वहन के लिए व्यवहार्य राजस्व मॉडल की पहचान
- बेहतर निर्णय क्षमता
- अन्य ज्ञान प्रबंधन संस्थानों जैसे विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संगठनों के साथ जुड़ना
सूचना स्रोत
हितधारक
आर.आर.आई.सी. के हितधारको में मुख्य रूप से मौजूदा और संभावित ग्रामीण संस्थान, विभिन्न शैक्षिक संस्थान, नई तालीम संस्थान, अन्य गांधीवादी संस्थान जैसे कि आश्रम, एन.सी.आर.आई. के उद्देश्यों के अनुरूप ग्रामीण लोगों को सशक्त बनाने की दिशा में कार्य कर रहे अन्य गैर सरकारी संगठन और स्वयंसेवी संगठन शामिल हैं। आर.आर.आई.सी. का उद्देश्य एक ओर विस्तरण सेवाओं को बढ़ावा देना और ग्रामीण समुदाय में उभरती चुनौतियों की प्रासंगिकता देखते हुए क्रिया अनुसंधान, आर्थिक और औद्योगिक गतिविधियां तथा दूसरी ओर नये ज्ञान, विशेषज्ञता, प्रौद्योगिकी, आविष्कार और अनुसंधान एवं विकास पर उद्योग के प्रयासों को बढ़ावा देना।
संपर्क :
परियोजना अधिकारी
दूरभाष : 040- 23422108
ई-मेल : aposd@ncri.in |