एन.सी.आर.आई. का मुख्य उद्देश्य शिक्षा को सामाजिक उन्नयन के उपयोगी उपकरण के रूप में काम में लाते हुए ग्रामीण भारत को सशक्त करना है।
परिषद की स्थापना के मुख्य उद्देश्य :
- शिक्षा पर महात्मा गांधी के क्रांतिकारी विचारों की तर्ज़ पर और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-1986(परिवर्ध्दित 1992) एवं डॉ.राधाकृष्णन आयोग के सुझावों का अनुसरण करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास की चुनौतियों के समाधान हेतु ग्रामीण उच्च शिक्षा को प्रोत्साहन देना है।
- ग्रामीण संस्थाओं के बीच संपर्क निर्माण करते हुए उनका विकास और मान्यता हेतु सहायता देना ।
- ग्रामीण संस्थानों को क्षेत्रीय विकास संस्थान और ग्रामीण विश्वविद्यालयों में बदलते हुए सक्रिय ज्ञान के केन्द्र के रूप में परस्पर जोड़ना और साथ ही उन्हें पिछड़े ग्रामीण क्षेत्रों की आवश्यकताओं के अनुसार उन्हें स्वैच्छिक प्रभावकारी भूमिका के रूप में विकसित करना है।
- ग्रामीण उच्च शिक्षा के क्षेत्र में ग्रामीण संस्थानों और भारत के सभी विश्वविद्यालयों के शैक्षणिक कार्यक्रमों की गुणवत्ता का विनियमन करना।
- नवीन प्रचलित ग्रामीण व्यवसायों पर आधारित आधारभूत पाठयक्रमों की रूपरेखा बनाना।
- गांधीवादी बुनियादी शिक्षण के अनुरूप शिक्षक-प्रशिक्षण सुविधाओं को सशक्त बनाना।
- इन सभी संस्थानों की पाठय सामग्री को विज्ञान तकनीक और प्रबंध पर जोर देते हुए सशक्त रूप में विकसित करना।
- व्यवसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम और ग्रामीण लोगों के आत्म-निर्भरता के प्रयासों को प्रोत्साहन देना।
- ग्रामीण संस्थानों के क्षेत्र आधारित कार्यक्रमों को प्रोत्साहन देना ।
- सामाजिक और ग्रामीण विकास के लिए व्यवहारिक अध्ययन को प्रोत्साहन देना ।
- व्यापक योजनाओं के माध्यम से समुदायों हेतु सेवाओं के विस्तारण को प्रोत्साहन देना।
- समय-समय पर ग्रामीण संस्थानों से जुडे सभी विषयों पर भारत सरकार को सलाह देना
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