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नयी तालीम केन्द्र
‘‘मैंने भारत को बहुत सारी चीजें दी हैं, मगर मेरे विचार में यह शिक्षा प्रणाली जो अपनी तकनीक के कारण उनमें सबसे उत्तम है और मैं नहीं समझता कि मैं देश को इससे बेहतर कुछ और दे सकता था।’’
                                                                                                – महात्मा गांधी

गांधीवादी शिक्षा के दर्शन पर आधारित कार्यक्रमों को बढ़ावा देने के लिए मई 2009 में नई तालीम केन्द्र की स्थापना की गई। नई तालीम का प्रचार और प्रसार एन.सी.आर.आई. के गतिविधियों का प्रमुख अंग हैं।  नई तालीम शिक्षा प्रणाली को शिक्षा के मुख्यधारा से जोडना और ‘विकास के लिए शिक्षा’ के महत्व को दर्शाते हुए अधिक से अधिक शैक्षणिक संस्थानों को नई तालीम अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना ही केन्द्र की कोशिश रही है। नई पीढ़ी के शिक्षकों को नई तालीम प्रशिक्षण के द्वारा इस शिक्षा व्यवस्था से अवगत कराया जाएगा। इसे शिक्षाविदों और विधि निर्माताओं के एकत्रित प्रयासों के द्वारा प्राप्त किया जा सकता है।

नई तालीम शिक्षा व्यवस्था को स्वामी विवेकानंद के निम्न व्याख्यान द्वारा बेहतर समझा जा सकता है : ‘‘मनुष्य में पहले से ही उपस्थित पूर्णत्व की अभिव्यक्ति ही शिक्षा है।’’ नैतिक मूल्यों और समुदाय से घनिष्ठ संबंधों पर आधारित दिल, दिमाग़ और हृदय के सामंजस्यपूर्ण विकास नई तालीम का मुख्य उद्देश्य है। बच्चों के ‘स्वभाव’ अनुसार प्राथमिक शिक्षा प्रदान करना ही नई तालीम का मूल तत्व है, जिससे ज्ञान को कार्य के साथ जोडकर बच्चों का समग्र विकास होता है। नई तालीम पद्धति में छात्र और अध्यापक के संबंध पर विशेष ध्यान दिया जाता है। जहाँ दोनों के बीच तालमेल और एक दूसरे के प्रति समानुभूति होनी चाहिए। यह तभी संभव है जब छात्र और अध्यापक साथ रहे और सीखने की प्रक्रिया में भाग ले। इससे एक दूसरे के प्रति विश्वास, सहानुभूति और सम्मान स्थापित होता है और छात्र को शिक्षा एक बोझ नहीं लगेगी।

नई तालीम शिक्षा व्यवस्था में 27 अंश हैं और 4 से 8, 9 से 16 और 16 से 25 वर्ष के आयु समूहों के लिए एक त्रिस्तरीय कार्यक्रम का अभिकल्पन किया है। यह शिक्षा प्रणाली मुख्य रूप से ग्रामीण बच्चों को विषय का आकलन आसानी से और जल्दी समझ आने के लिए सिद्धांतों के साथ व्यावहारिक ज्ञान और मातृभाषा के उपयोग को प्राथमिकता, चरित्र निर्माण और बचपन से ही सामाजिक रूप में ढालने पर आधारित है।

मिशन
संस्थानों द्वारा नई तालीम डिग्री और डिप्लोमा के मान्यता प्रदान कर मूलगामी स्तर पर नई तालीम प्रणाली का प्रसार करने हेतु देशभर में नई तालीम केन्द्रों की स्थापना के लिए संस्थानों और गैर सरकारी संगठनों को जुटाकर उन्हें प्रेरित करना, नई तालीम को उच्चतर शिक्षा के स्तर पर बढ़ावा देना, इस क्षेत्र से राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों के साथ सहभाग, पाठ्यक्रम का विकास और सभी प्रादेशिक भाषाओं में अध्ययन सामग्री को अनुवादित करना, सभी नई तालीम संस्थानों में नेटवर्कींग सुविधा को सुकर बनाना, नई तालीम स्कूलों के लिए शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानो को सहायता प्रदान करना, शिक्षा में गांधी दर्शन को बढ़ावा देना।

लक्ष्य
एक शीर्ष निकाय स्थापित करने के साथ राष्ट्रीय स्तर पर एक नीति विकसित कर इस प्रणाली को मार्गदर्शन देना हमारा उद्देश्य है।

उद्देश्य

  • गांधीवादी बुनियादी शिक्षा के कार्यक्रमों में लगे संस्थानों के विकास के लिए उनके बीच संपर्क और सम्न्वय स्थापित करना।
  • नई पीढ़ी नई तालीम शिक्षक प्रशिक्षण सुविधायें।
  • नई तालीम डिग्री/डिप्लोमा/प्रमाणपत्रों के लिए समतुल्यता प्राप्त करना।
  • वैचारिक और सैद्धांतिक दृष्टिकोण का मूल्यांकन।
  • नई तालीम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आई.सी.टी.) का प्रयोग करना।
  • देशभर में नई तालीम संस्थानों की स्थापना के लिए संस्थानों और गैर सरकारी संगठनों को प्रेरित करना।
  • सहभागी लोगों की जरूरतों को पूरा करने के लिए पुस्तकालय की सुविधा प्रदान करना।
  • वर्तमान संदर्भ में बुनियादी शिक्षा के सिद्धांतों का उपयोग करने हेतु एक पाठ्यक्रम का विकास करना।

कार्यक्रम

  • नई तालीम संवेदीकरण कार्यक्रम
  • नई पीढ़ी नई तालीम शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम (एन.जी.एन.टी.टी.टी.)
  • नई तालीम संस्थानों को सहायता।
  • इस शिक्षा प्रणाली में आए नये प्रवेशकों को सहायता।
  • नई तालीम अभिविन्यास और पद्धति।

वर्तमान गतिविधियाँ :

  1. नई तालीम संस्थानों और स्कूलों की निर्देशिका का अद्यतनीकरण।
  2. विभिन्न शैक्षणिक हलकों में नई तालीम के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए कार्यशालाओं/संगोष्ठियों का आयोजन।
  3. नई तालीम से संबंधित विभिन्न लोगों, विशेषज्ञों, स्कूलों और संस्थानों से नई तालीम पर संदर्भ सामग्री का संग्रहण करना।
  4. प्रकाशन।

आयोजन
नई तालीम पर एक राष्ट्रीय स्तर के स्थायी समिति का गठन
बच्चों के समग्र विकास को सक्षम करने हेतु स्कूलों में नई तालीम शिक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने के मुद्दे पर विचार-विमर्श करने के लिए एक राष्ट्रीय स्तर के स्थायी समिति की समन्वय बैठक 19 मई, 2011 को नई दिल्ली के गांधी शांति प्रतिष्ठान में आयोजित की गई। इसमें नई तालीम शिक्षा विशेषज्ञों, शिक्षकों, मूलगामी स्तर के कार्यकर्ताओं और शिक्षाविदों के साथ एन.सी.आर.आई. के अध्यक्ष डॉ. एस.वी. प्रभात और उपाध्यक्ष श्री पी.वी. राजगोपाल ने भी भाग लिया। बैठक में इस बात पर आम सहमति थी कि नई तालीम के सफल क्रियान्वयन के लिए नई पीढ़ी के शिक्षकों को नई तालीम पर प्रशिक्षण देना आवश्यक है। गुजरात में प्रमुख नई तालीम संस्थानों के गुणात्मक प्रभावों पर एक अध्ययन के लिए एक अनुसंधान कार्य किया जाएगा। आज की प्रासंगिकता को ध्यान में रखते हुए नई तालीम को नए सिरे से परिभाषित करना चाहिए ऐसी बैठक में सिफारिश की गई।

समिति

  • श्री पी.वी. राजगोपाल
  • श्री राजीव वोरा
  • श्री कनकमल गांधी
  • डॉ. विभा गुप्ता
  • डॉ. सुदर्शन आयंगार

संस्थानों के साथ संलग्नता

  1. नई तालीम शिक्षा प्रणाली को बढ़ावा।
  2. आज के संदर्भ में मौजूदा पाठ्यक्रम का अद्यतनीकरण।
  3. नई तालीम शिक्षा के प्रति समुदाय के लिए अभिविन्यास और संवेदीकरण।
  4. पुनःरभिविन्यास और शिक्षकों की समीक्षा के लिए कार्यशालाओं और संगोष्ठियों का आयोजन।
  5. समुदाय के लिए नई तालीम के तहत विस्तरण सेवाओं का विस्तार।
  6. नई तालीम के माध्यम से पारंपरिक प्रथाओं का संरक्षण।.
  7. मॉडल स्कूलों की स्थापना।
  8. ग्रामीण विकास, कृषि, विज्ञान और प्रौद्योगिकी जैसे विभिन्न क्षेत्रों में से प्राप्त आदानों से इस शिक्षा प्रणाली को मजबूत बनाना।

प्रकाशन
विभिन्न शिक्षाविदों, चिकित्सकों, विशेषज्ञों और नई तालीम पढ़ा रहे शिक्षकों के अनुसार वर्तमान समय में देश में नई तालीम की दशा के बारे में विचारों को प्रकट करते हुए लिखे हुए लेखों का संग्रह दो पुस्तकों के रूप में प्रकाशित किया गया वे इस प्रकार हैं : अंग्रेजी में “Perspectives of Nai Talim”  और हिंदी में ‘‘नई तालीम : नया परिप्रेक्ष्य’’।


संपर्क :
सह-परियोजना अधिकारी
नई तालीम केन्द्र
दूरभाष : 040-23422109, फैक्स : 040-23212114
ई-मेल : naitalim@ncri.in