‘‘लोगों को समझना और अपने कार्य निर्वहन में उन्हें शामिल करना ही नेतृत्व है।’’
सूक्ष्म स्तरीय नियोजन का मूल ग्रामस्वराज की अवधारणा में है। ‘ग्रामस्वराज’ महात्मा गांधी द्वारा एक अहिंसक, स्वतन्त्र एवं गणतंत्र भारत के कल्पना का एक भाग है। गांधीजी अक्सर कहा करते थे कि अगर समानता एवं भाईचारे पर आधारित मानवजाति का विकास होना है तो समाज के सबसे पिछडे वर्गों के उद्धार के लिए कदम उठाना बहुत जरूरी है। इसीलिये इन वर्गों के उत्थान को दृष्टि में रखे बगैर तैयार की गई कोई भी राष्ट्रीय स्तर आर्थिक योजना सफल नहीं होगी। अंत में इन्सान के जीवनमान को उपर उठाने, परिष्कृत और समेकित करना ही इसका मुख्य उद्देश्य होना चाहिए। दूसरे शब्दों में आर्थिक योजना नागरिकों के लिए है न कि राष्ट्रीय योजना के लिए नागरिक है। इसीलिए हर व्यक्ति को अपने क्षमता अनुसार सुमार्ग पर चलते हुए जीविकोपार्जन करने का हक मिलना चाहिए।
सूक्ष्म नियोजन इकाई एन.सी.आर.आई. की एक प्रमुख अंग है। कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, प्राकृतिक संसाधन संरक्षण और पारिस्थितिकी प्रबंधन के क्षेत्र में मूलगामी स्तर पर नियोजन, विस्तरण, अनुसंधान और नीति निर्धारण में यह इकाई एक कार्यसाधक भूमिका निभाता है। एन.सी.आर.आई. अपनी स्थापना के समय से ही सूक्ष्म नियोजन के माध्यम से ग्रामीण समुदायों की विकास योजनाओं के बारे में ग्रामीण समाज की जागृति और मूलगामी स्तर पर लोगों की सहभागिता के लिए प्रयासरत है।
दूरदर्शिता और लक्ष्य :
- सूक्ष्म नियोजन से भारत के ग्रामीण संस्थानो को सशक्त बनाना
- योजना और प्रशासन के विकेन्द्रीकरण की प्रक्रिया का समर्थन
- ग्रामीण संस्थानो का उन्नयन
- ग्रामीण वि कास के लिए योजना बनाने की प्रक्रिया में इकाई को एक स्वायत्त निकाय के रूप में मजबूत बनाना
उद्देश्य :
शिक्षा पर महात्मा गांधी के क्रांतिकारी विचारों की तर्ज़ पर सहभागिता दृष्टिकोण से ग्रामीण क्षेत्रों के परिवर्तन में सूक्ष्म नियोजन की चुनौतियों के समाधान हेतु ग्रामीण उच्च शिक्षा को प्रोत्साहन देना।
- ग्रामीण संस्थाओं के बीच संपर्क निर्माण करते हुए उनको क्षेत्रीय विकास केंद्रों के रूप में विकसित करना।
- ग्रामीण क्षेत्रों के हितों के लिए सूक्ष्म-स्तर पर नियोजन के अन्तर्गत योजना एवं प्रशासन को जोड़ने के लिए कार्यसाधक कड़ी के रूप में कार्य करना।
- पंचायत राज प्रणाली में विकेंद्रीकरण की प्रक्रिया को अधिक महत्व देना।
- सरकार की संरचनात्मक जिम्मेदारी को कम कर लोगों की भागीदारी को सुनिश्चित करना।
- मानव ऊर्जा का दोहन करते हुए समावेशी विकास लाना और शहरी क्षेत्रों की ओर पलायन को रोकना।
- ग्रामीण संस्थानों के माध्यम से सामाजिक एवं वैकासिक न्याय को बढ़ावा देना।
- गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों के लिए निचले स्तर पर योजना बनाना।
वर्तमान गतिविधियाँ :
- ग्रामीण संस्थानों के सूक्ष्म नियोजन पर आधारित परियोजनाओं को सहायता प्रदान करना।
- कार्यशालाओं और संगोष्ठियों का आयोजन।
- विशेषज्ञों के साथ परामर्श कर मांग पर आधारित अल्पावधि के सर्टिफिकेट पाठ्यक्रम का अभिकल्पन
- प्रकाशन
- यशोगाथा का प्रलेखन
- राष्ट्रीय महत्व के किसी एक विषय पर अनुसंधान अभ्यास को सहायता देना
कार्यक्रम :
इकाई द्वारा वर्ष 2010-11 के दौरान सूक्ष्म-स्तर के नियोजन पर केरल, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, तमिलनाडू, उत्तर प्रदेश एवं हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण संस्थानों के सहयोग से चार कार्यशालाओं और दो प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन किया। इसके अलावा एन.सी.आर.आई. हैदराबाद में सूक्ष्म नियोजन पर एक परामर्श कार्यशाला का आयोजन भी किया गया।
संपर्क :
दूरभाष : 040-23422119,
ई-मेल : mpu@ncri.in
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