विश्व पर्यावरण दिवस का आयोजन
चक्र के प्रयासों के परिणामस्वरूप डिलॉइट के साथ काम करे आईटी क्षेत्र के 17 युवाओं की भागीदारी के साथ विश्व पर्यावरण दिवस का आयोजन ग्रामीण परिवेश में किया गया। वे सभी शमसाबाद मण्डल रंगारेड्डी जिले के बुर्जुगड्डा थाण्डा में उपनाम प्रभावित दिवस पर एक स्वास्थ्य शिविर आयोजित करना चाहते थे। इस कार्यक्रम की सहयोगी संस्था ग्रामीण विकास के लिए वसावी समाज था जो कि दो दश्कों से बुर्जुगड्डा में विकास कार्यक्रमों में संलग्न है।
इस शिविर से लगभग स्वास्थ्य एवं स्वास्थ्यकर परिस्थितियों पर ध्यान आकर्षित करके 250 ग्रामीण लोग लाभान्वित हुए। कार्यक्रम के एक हिस्से के रूप में ग्रामीणों को स्वास्थ्य की देखभाल के लिए क्या करना और क्या नहीं करना चाहिए, सुलभ सुविधाएं और वैयक्तिक देखभाल के साथ यह शिविर ऐजिस के दारा आयोजित किया गया था। बाद के दिन में चक्र संयोजक श्री जीवीवीएसडीएस प्रसाद ने स्वयंसेवकों को संबोधित किया और पूरे ग्लोब पर पर्यावरण के संरक्षण के संबंध में पाई जाने वाली समस्याओं के संदर्भ में उठाये जाने वाले जरूरी कदमों की ओर सबका ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने वाली हमारी दिखावे की ज़िंदगी का उल्लेख अपने विशेष संबोधन में किया। ओजोन परत का क्षरण तपती धरती खाद्य पदार्थों, हवा और पानी इस खर्चीली जीवन शैली के कुछ खतरनाक नतीजे हैं। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी इन रूझानों के लिए आगाह भी किया था और कहा कि धरती ने प्रत्येक मानव की जरूरत के हिसाब से पर्याप्त दिया है पर किसी की लालच को पूरा करने के लिए नहीं। उन्होंने जोऱ दिया कि साधारण जीवन शैली जैसा कि महात्मा गांधी द्वारा एक अकेला वास्तविक समाधान दिया गया है कि धारणीयता को बनाए रखने के लिए मानवता के लिए यह जरूरी है कि पर्यावरण के संतुलन को बना कर रखें।
अफगानिस्तान की आवाज़
आशुतोष मोहन्ती जो कि नेपाल के अंतराष्ट्रीय समेकित हिमालय केन्द्र के क्षेत्रीय समर्थ विकास अधिकारी हैं की ज़िदगी को उस समय धक्का लगा जब उन्होंने युद्ध प्रभावित अफगानिस्तान की राजधानी काबुल जलालाबाद और नानगहर आदि का दौरा किया। दो बंदूकधारी अफगान सैनिकों के साथ आशुतोष विश्वविद्यालय एवं देश के जानने वाले संभावित अध्येताओं प्रशिक्षण की उन उच्च संस्थाओं में जो की कनाडा की अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान विकास केन्द्र एवं हिमालया विश्वविद्यालय संघ और वन और पर्यावरण मंत्रालय दारा प्रायोजित थे।
मोहन्ती का अफगानिस्तान अभियान 12 अप्रैल को देश के 25 छात्रों को छात्रवृत्ति कार्यक्रम के एक भाग के रूप में क्षमताओं के विकास कार्यक्रम के अंतर्गत अफगानी शिक्षकों एवं छात्रों को उनके अध्ययन को जारी रखने में विज्ञान और तकनीक की सहायता और प्रयोग करने, सामाजिक आर्थिक और पर्यावरणीय समस्याओं के दीर्घकालिक उपायों के विकास के साथ शुरु हुआ।
आप चारों तरफ फैली इस शांति को देख सकते हैं। युद्ध ने अफगानिस्तान को बर्बाद कर दिया। वे लड़कियां जो तालिबानियों की धमकियों से अपनी पढ़ाई छोड़ गईं थीं धीरे-धीरे परिसरों की ओर वापस लौट रहीं हैं। कुछ छात्रों ने बताया कि अफगान साम्राज्य के दौरान पुस्तकालयों को ज़ला देने के कारण वहॉं पुस्तकें उपलब्ध नहीं थी। सारी प्रयोगशालाएं नष्ट हो गई थीं। वरिष्ठ प्रवक्ता ने परिसर के बारे में यह बयान किया। मोहन्ती उनके बोलते रहने से पहले कुछ देर के लिए ठहर गए। मैं राजधानी काबुल के हर तरफ सुदूर तक फैली पहाड़ियों से बमुश्किल कुछेक को बंदूकों के गलियारों में घूमते हुए देख सकता था। मोहन्ती ने अपने अनुभवों को राष्ट्रीय ग्रामीण संस्थान परिषद हैदराबाद के अध्यक्ष डॉ एस वी प्रभात को बताने के पहले याद किया। जब अध्यक्ष ने यह जानना चाहा कि उसके द्वारा घूमे गये अन्य शहर कैसे थे, मोहन्ती ने कहा वह ज़लालाबाद के अध्ययन केन्द्र पर गया अलबरूनी विश्वविद्यालय और बामियान विश्वविद्यालय कंधार और छात्रों को भारत सरकार द्वारा बढ़ा दी गई सहायता के मार्ग में आनेवाली बाधाओं को सरल करना बताया। डॉ प्रभात से बातचीत करते हुए आशुतोष ने संकेत दिया कि अफगान की दशाएं भारत जैसे बड़े देशों के पुर्ननिर्माण के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों के अंतर्गत अफगान की स्थितियाँ बहुत तेज़ गति से सामान्य हो रही थीं।
अध्येतावृत्तियों और शैक्षणिक सहयोग को अफ़गान प्राध्यापकों और छात्रों के क्षमता विकास कार्यक्रमों के लिए विस्तारित किया गया था। मोहन्ती ने बताया कि स्नातकोत्तर डिग्री में प्रत्येक छात्र को जो प्राकृतिक विज्ञान आपदा प्रबंधन पशु चिकित्सा सामाजिक विज्ञान कृषि, फूलों की खेती, भूस्थैतिक सूचना प्रणाली और दूरस्थ ज्ञान को छात्रवृत्ति की राशि प्राप्त हो रही थी वह भारतीय रुपयों में 20 लाख रूपयों के बराबर है।
तंबाकू निषेध दिवस और एन.सी.आर.आई
एक आयोजित सहयोगी सहित चिकित्सा बीमा सेवाएं एपी दंत संघ स्वैच्छिक स्वास्थ्य समिति हैदराबाद सरकारी दंत चिकित्सा कॉलेज और अन्य स्वैच्छिक संगठनों ने 31 मई को तंबाकू निषेध दिवस पर हैदराबाद में रैली निकालने और एक बड़ा स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया। मीनारों के इस शहर में आग थी पर कहीं भी धुआं नहीं था। सफेद कोट सुबह की हवा में लहरा रहे थे। 31 मई की सुबह 8 बजे तंबाकू निषेध दिवस। डॉक्टर्स और युवा चिकित्सक छात्र एक प्रभावकारी मानव श्रृंखला के रूप में थे जिन्हें गुज़रने वाले देखकर संभ्रमित हो गये ।
दंत चिकित्सा शिविर का आयोजन ऐजिस चिकित्सा बीमा सेवा के अंतर्गत एपी दंत संघ हैदराबाद खण्ड एपी स्वैच्छिक स्वास्थ्य समिति ग्रामीण विकास वसावा समाज आंध्र प्रदेश सर्वोदया मण्डल, कामायिनी दंत विज्ञान संस्थान हैदराबाद, सरकारी दंत कॉलेज अस्पताल एआइडी आदि के सहयोग से किया गया। प्रधान सचिव डॉ श्रीकांत ने सक्रियता से अपनी फौज को पंक्तिबद्ध कर यह सुनिश्चित कर लिया था कि कोइ व्यवधान न आए। चार वैन चिकित्सा सुविधाओं से लैस ईएसआइ अस्पताल के परिसर में पंक्ति में तैयार खड़ीं थीं और दर्जन डॉक्टर्स और रेज़ीडेंट डॉक्टर्स भी वहाँ उपस्थित थे। वहाँ पर स्वदेशी धारित नाश्ते के लिए अंतराल भी था। यह न केवल उत्पादों को बेचना है, साथ ही, लोगों को स्वदेशी उत्पादों को उपयोग में लाने की आवश्यकता के बारे में शिक्षित भी करना है और गांधी के विचारों की वर्तमान प्रासंगिकता के बारे में भी बताना है।
संपूर्ण प्रासंगिकता युवा संवेदनशील कार्यक्रम एनसीआरआइ का एक प्रमुख चलने वाला कार्यक्रम है जो कि अध्यक्ष डॉ एस वी प्रभात द्वारा बनाया गया। आज के युवा पश्चिमी सभ्यता से बहुत अधिक प्रभावित होकर आश्चर्यचकित आसपास देखे जा सकते हैं अथवा अधनंगे फकीर की तरह बात करते जैसा कि कभी चर्चिल ने उल्लेख किया था कि यह वह महान इंसान है जो इस पृथ्वी पर चला होगा। हालांकि बहुत कुछ परिवर्तित हो रहा है और आनेवाले समय के बारे में आप कहेंगे कि तुम अगर इन दिशाहीन युवाओं से मिलते जो पिछली 20वीं सदी के होते थे और अब एड भारत समाज अमेरिकी मुख्यालय के सदस्य हैं। यह व्यक्ति किरन जो कि टेक्सास और ऑस्टिन में एक आइटी पेशेवर के रूप में काम करते हुए अमेरिकी सपने के साथ जी रहा था। अब सब कुछ वहाँ छोड़कर भारत वापस आ गया। भारतीय सपने के साथ भारत को एक मजबूत देश बनाने के लिए एक ऐसा भारत जो कि सामाजिक-आर्थिक और वैधानिक तौर पर समान हो। किरन बताते हैं कि कई सारे आईटी पेशेवर अपनी ऊंची तनख्वाह वाली नौकरियां छोड़ कर एआइडी में सम्मिलित हो गए जिसके 35 शाखाएं अमेरिका में हैं। और अब 4 या 5 हैदराबाद, चैन्नई और दिल्ली में संचालित हो रही हैं। बहुत सारे लोग हालांकि स्वैच्छिक रूप से काम कर रहे हैं। कुछ जीवन साथी के रूप में नौकरी पर और अध्येतावृत्ति दी जा रही है। कोमल रस्तोगी, डिलॉइट में काम रही, ने भाग लिया और सुनिश्चित किया कि गांधीवादी विचारों पर काम करने की जरूरत हैं। ये सब बताते हैं कि गांधीवादी दर्शन और विचार अभी भी पुस्तकालयों की उन धूलभरी किताबों में गुम नहीं हुए हैं। राज भवन का ऑरनेट हॉल प्रतिनिधियों से भरा हुआ था जहाँ प्रतिनिधि अध्यक्ष एस वी प्रभात के साथ आए थे जो कि वहाँ उपस्थित प्रतिनिधियों और प्रतिभागी संगठनों का परिचय करवा रहे थे। राज्यपाल एन डी तिवारी उस साल 82 साल के हो रहे थे सब लोगों से लॉन में मिलने का निश्चय किया। वहॉं कैमरामैन और पोस्टर बैनर लिए छात्रों और चिकित्सकों के बीच अपने जगह को लेकर थोड़ी धक्कामुक्की हो गई।
विशेषकर एक दिल को छूने वाला क्षण था जब एक युवा लड़की अनुपमा पण्डवा ने अपने पिता से कहा कि डैड हम ये सब नहीं चाहते हैं हम सब अपना स्वस्थ भविष्य चाहते हैं इसके अलावा सारे डैड के घर से यह धुआं निकला और वह जोखिम और दर्द का दूसरा धुआं था। एक बैनर जिसका पढ़ा धुआं मारता है और एक कैंसर को दर्शाने वाले केकड़े के बजाय बिच्छू का रेखचित्र उपयोग में लाया गया था। राज्यपाल ने अपने संक्षिप्त भाषण में स्मोकिंग के खतरों और अपनी बचपन की यादों को दोहराया कि उनके पिता ने उनको उस समय चेतावनी दी जब सिगरेट इतना आम नहीं थी कि कभी बीड़ी को हाथ भी नहीं लगाया। उन्होंने कहा कि छात्रों के स्कूली पाठ्यक्रम को स्मोकिंग के खतरों से जागरूक करने वाला बनाना चाहिए। और यह आश्वासन दिया कि वे इन लाल कर देने वाले तेज शोर वाले स्मोकिंग विरोधी नारों के आधार पर इस संबोधित करेंगे इसके फायदे के प्रमाण और रैली का आयोजित होना। |