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वेब एनसीआरआई
सहयोग

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) की क्षमताएं और संजाल। यह हमारे संसाधन समूह में पारस्परिक लाभकारी समझा गया। अनुभव, विशेषज्ञ और ज्ञान के फैलाव के साझा प्रयासों की समर्थताओं और लोगों के सशक्तीरण के लिए कुशलताओं के निर्धारित लक्ष्य विशेषकर उन तटवर्ती इलाकों और महिलाओं, गरीबों और दलित को समय के साथ रखने के माध्यम से। हमारा मुख्य ध्यान शिक्षा के गुणवत्ता कार्यक्रम और गांधीवादी दर्शनों पर आधारित अनुप्रयोग विशेषकर नई तालीम, शांति और संघर्ष प्रबंधन को निर्मित या प्रदर्शित करने पर है।

समझौता पत्र की मुख्य बातें

  1. इग्नू और एनसीआरआइ पूर्व द्वारा गांधीवादी दर्शन पर बनाए गए सर्टिफिकेट, डिप्लोमा, स्नातकोत्तर और पीएचडी के प्रमुख शिक्षा कार्यक्रमों को फैलाने में सहयोग करेंगे।
  2. एनसीआरआइ स्वयं भी शांति में पीजी डिप्लोमा पाठ्‌यक्रम को निर्मित करेगा और गांधीवादी विचारों और उपायों को दर्शाने वाले संघर्ष समाधान के एक ऐसे पाठ्‌यक्रम में एनसीआरआइ की विशेष रूचि है।
  3. एनसीआरआइ और इग्नू, लघु नई तालीम के उपलब्ध और नई पीढ़ी के शिक्षकों हेतु लघु अवधि सर्टिफिकेट कार्यक्रम, नई तालीम (बुनियादी शिक्षा) के लिए विकसित करेंगे।
  4. एनसीआरआइ उपरोक्त दिए गए विभिन्न पाठ्‌यक्रमों के नए अध्ययन केंद्रों की पहचान करेगा और वहाँ विभिन्न सुविधाओं को उपलब्ध कराने की भी कोशिश करेगा। 
  5. इस प्रकार ये अध्ययन केन्द्र इग्नू और एनसीआरआइ के गांधीवादी अध्ययनों के लिए एक संसाधन केन्द्र के रूप में काम करेंगे।
  6. एनसीआरआइ एम.ए/पीजी डिप्लोमा के उन परियोजना कार्यों को प्रोत्साहन देगा जो गांधीवादी विचारों के अनुप्रयोगों/ हस्तक्षेपों/ अध्ययनों पर आधारित होंगे।
  7. एनसीआरआइ कुछ चुनिंदा अध्ययन केंद्रों की गांधीवादी अध्ययनों से संबंधित निर्धारित अकादमिक और परियोजना कार्यों/ गतिविधियों का समन्वय करेगा।

समझौता परिपत्र पर हस्ताक्षर 27 मार्च 2009 को इग्नू के नई दिल्ली परिसर में एनसीआरआइ के सचिव सदस्य द्वारा किया गया और यह तत्काल प्रभाव में आ गया। इग्नू के नई दिल्ली परिसर में आयोजित एक सादे समारोह में एनसीआरआइ की तरफ से सदस्य सचिव श्री सतीश नम्बूदरिपाद और प्रो. राघवुलु वहाँ उपस्थित थे। एनसीआरआइ की प्रशासनिक संरचना ने दूरस्थ माध्यम से शुरू किये जानेवाले विभिन्न कार्यक्रमों- शांति और संघर्ष समाधान के लिए जरूरतों को पूरा करने के लिए 25 लाख रुपये स्वीकृत किये। एनसीआरआइ न केवल ग्रामीण संस्थाओं की पहचान करेगी और विभिन्न राज्य सरकारों के साथ सलाह मशविरा करके उन कदमों की शुरुआत भी करेगी जिससे जनजाति और दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्र इस कार्यक्रम का लाभ ले सकें।